जुमे की फ़ज़ीलत: शुक्रवार की अहमियत, आमाल और हदीस Reference | Rahmat Ki Dua
इस्लाम में जुमे का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। जुमे को अरबी में यौमुल जुमुआ कहा जाता है। यह दिन मुसलमानों के लिए इबादत, अल्लाह की याद, दुआ और नेक कामों का विशेष अवसर है। अल्लाह तआला ने कुरआन में जुमे की नमाज़ के लिए पुकारे जाने पर अल्लाह की याद की ओर बढ़ने और व्यापार छोड़ने का आदेश दिया है। इससे इस दिन की अहमियत स्पष्ट होती है। जुमे के दिन मुसलमान जुमे की नमाज़ अदा करते हैं, खुतबा सुनते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अल्लाह से अपनी जरूरतों के लिए दुआ माँगते हैं। जुमे के दिन पढ़ने के लिए दुआ जुमे के दिन अल्लाह से रहमत, मग़फ़िरत और हिदायत माँगना अच्छा अमल है। नीचे एक सामान्य दुआ दी गई है। इसे जुमे के लिए विशेष रूप से निर्धारित दुआ न समझें। अरबी दुआ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ हिंदी उच्चारण रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव वफ़िल आख़िरति हसनतंव वक़िना अज़ाबन्नार। हिंदी अर्थ ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई प्रदान कर, आख़िरत में भी भलाई प्रदान कर और हमें आग के अज़ाब से बचा। कुरआन संदर्भ: सूरह अल-बक़रह, 2:201। जुमे की फ़ज़ीलत औ...